कोरोना के खतरे को लेकर भारत सरकार ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद देश में लॉकडाउन लगा दिया था, जो अभी तक जारी है। एक तरफ लोगों को कोरोना से अपनी जान का खतरा है वहीं सभी तरह के रोजगार भी ठप होकर रह गए हैं, जिससे लोगों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। इस समय खादर क्षेत्र में हजारों बीघा खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरे की फसलें तैयार खड़ी हैं। इन फसलों को किसानों ने बड़ी मेहनत और खून पसीने की कमाई लगाकर सींचा है। अनेक किसानों ने तो कर्ज पर पैसा लेकर फसल तैयार की है। गत वर्षों में खादर के किसान अपनी फसलों को हरियाणा, उतराखंड और यूपी में बेचते थे लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण चारों और के रास्ते बंद हैं, जिससे किसान अपनी फसलों को बेचने के लिए परेशान हैं। गुलजार, नसीम, बासित अली, मसरूर, जहांगीर आदि ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही शासन प्रशासन ने इस और ध्यान नहीं दिया तो उनकी फसलें खेतों में ही बरबाद हो जाएगी। जिससे किसानों के सामने रोजी रोटी को संकट खड़ा हो जाएगा।
लॉकडाउन में सब्जियों के बढ़े दाम
लॉकडाउन के चलते स्थानीय स्तर पर उत्पन्न सब्जियों के भाव स्थिर बने हुए हैं। वहीं अन्य शहरों से आने वाली सब्जियों के कीमत में उतार-चढ़ाव लगा रहता है।
लॉकडाउन शुरू होने के प्रारंभिक दिनों में तो सब्जी के मूल्य में जबरदस्त उछाल आया था लेकिन पिछले लगभग दो सप्ताह से जो सब्जी स्थानीय स्तर पर उत्पन्न हो रही हैं उनका मूल्य स्थिर है। इनमें फ्रांसबीन 10 -12 रुपये, बैंगन 15-16 रुपये, मूली 10 -12 रुपये, पुदीना 20-25 रुपये, धनिया 15-20 रुपये, आलू 18-20 रुपये, भिडी 40-45 रुपये तक बिक रहे हैं। जबकि अन्य शहरों से खरीद कर लाए जाने वाले लौकी, कद्दू व खीरा 10-15 रुपये, टमाटर 24 -25 रुपये, तुरई व करेला 40-45 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। सब्जी विक्रेता शमशाद, गोपाल व आमिर आदि का कहना है कि दूसरे से शहर की मंडियों से सब्जी खरीद कर लाने ले जाने में खर्चा अधिक आने और लॉकडाउन के चलते परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है।
उधर किसान श्याम सिंह, लियाकत खान, संदीप, अरविद कुमार व जगपाल सिंह आदि का कहना है कि वह आमतौर पर स्थानीय जरूरत के हिसाब से ही सब्जी उगाते हैं। बड़े सब्जी उत्पादक अपना माल सहारनपुर व अन्य बड़ी मंडियों में बेचते हैं।